दिल से चाहा मैंने उसेसोचा था उसके बारे मेंपहले तो मैं डर गयापर सोचा आज तो करना हैफिर शुरु हो गया द्वंद्वउसके और मेरे बीचबहुत ही प्रयासों सेआखिर वो मिल ही गयीये मेरे सपने के सच होने जैसा थाखुशी मिली असीम मुझेउसके स्वाद की अनुभूति नेकर दिया मुझे आत्मविभोरवो कोई और नहीं थीवो थी मेरी पहली रोटीलेकिन वो कोई साधारण रोटी नहींरोटी थी मेरे आत्मविश्वास कीजिसे...