अनुभूति गुजरे दिनो कीतब मै इतना बेबस न था क्योंकि इतना बडा न थाये बडा होना बेबसी का कहर बरपाता चला जायेगाऔर मिलने पर कभी सडक के आर पार खिलखिलाकर मुस्कुरा देगें होने पर सामनाउमड़ती भावनाओं को अनुपस्थिती के जज्बातों कोआंखो की नमी से धुमिल कर देंग...
कुछ भी ऐसा जो मन को भा गया