
वो आयी
इस तरह
जैसे पीली शाम हो
थकी हुई सहमी हुई
वो आयी तो जरुर
लेकिन जाने के लिये
आज फ़िर किसी ने
तोड़ा है उसके सम्मान को
एक कली की तरह
वह टूट गयी फ़िर एक बार
मैं कुछ न कर सका
और वह चली गयी
जैसे पीली शाम हो
पर उम्मीद है मुझे
वो आयेगी फ़िर से
सुबह बन के
छा जायेगी पूरे क्षितिज पर
रोशनी होगी हर तरफ़
वो आयेगी जरुर आयेगी………!
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बहुत सुन्दर रचना
आभार ...........
आशावादी भाव संजोती अभिव्यक्ति.