अब नही सहेंगे

Saturday 29 November 2008 | comments (2)



हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए


इस हिमालय से कोई गंगा निकालनी चाहिए!


सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही


मेरी कोशिश है की ये सूरत बदलनी चाहिए !


( विरोध नही अब विद्रोह होगा , शोक नही संघार होगा!)



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29 November 2008 at 4:00 PM

good. narayan narayan

29 November 2008 at 6:08 PM

बहुत अच्छा .

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